जालोर में सचिव की पहल से जेल में अनपढ़ बंदी सीख रहे आखर ज्ञान


जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव नरेन्द्रसिंह की पहल
-जिला मुख्यालय सहित जिले की भीनमाल उपकारागृह में चल रही है बंदियों के कक्षाएं
जालोर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालोर की ओर से निरक्षर बंदियों को साक्षर करने की सकारात्मक पहल शुरू की गई है, कारागृह में प्रतिदिन कक्षाएं लगाई जा रही है जिसमें बंदियों को आखर ज्ञान दिया जा रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव नरेन्द्रसिंह ने सबसे पहले जिला मुख्यालय पर स्थित जिला कारागृह में निरक्षर बंदियों को साक्षर करने का कार्य शुरू करवाया। जिसके लिए उन्होंने साक्षरता विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर बंदियों को स्लेट, स्लेट पेन व नोटबुक उपलब्ध करवाई गई तथा कारागृह के उप कारापाल को निर्देशित किया गया कि कारागृह में ऐसे बंदी जो पढे लिखे हैं उनको प्रोत्साहित किया जाये जो उनके साथी निरक्षर बंदियों को पढाने के लिए तैयार हो। सहायक कारापाल सईद अब्दुल ने कारागृह में पढे लिखे बंदियों को प्रोत्साहित किया तो शुरू में दो बंदी इस कार्य के लिए स्वेच्छिक रूप से तैयार हो गये। जिला कारागृह में दो बंदियों द्वारा सबसे पहले प्रतिदिन कक्षाएं लगाई जाकर बंदियों को साक्षर करने का कार्य शुरू किया गया, प्रयोग सफल होने पर जिले के भीनमाल उप कारागृह में भी पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाकर वहां पर निरक्षर बंदियों को साक्षर करने का कार्य शुरू किया गया। प्रयोग सफल होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव नरेन्द्रसिंह ने अब सांचौर उपकारागृह में भी ऐसी ही कक्षाएं लगाये जाने के निर्देश दिये गये है।
-निरीक्षण के दौरान आया ख्याल
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव नरेन्द्रसिंह की ओर जिले की जिला मुख्यालय की जेल में साप्ताहिक निरीक्षण के दौरान बंदियों से वार्तालाप के दौरान यह तथ्य सामने आया कि यहां पर कई बंदी ऐसे है जो निरक्षर है, उन्हें अक्षर ज्ञान नहीं है और वे हस्ताक्षर करने के स्थान पर अंगूठा लगाते हैं। तब उन्होंने ऐसे बंदियों को साक्षर करने के लिए योजना बनाई। उन्होंने जेल में बंद साक्षर और पढे लिखे बंदियों को इस कार्य में सहयोग की बात कही और अनपढ बंदियों को पढाने के लिए आगे आने का आह्वान किया। इसके लिए उन्होंने सहायक कारापाल को निर्देश दिये कि कारागृह में अनपढ बंदियों को पढाने के लिए पढेलिखे बंदियों को प्रोत्साहित किया जावें।
-अनपढ बंदियों ने सीख लिया अपना नाम
जिला कारागृह में कई बंदी जो पहले हस्ताक्षर करने के स्थान पर अंगूठा लगाते थे, अब वे अपना खुद का नाम लिखने लगे है। इसके अलावा अक्षर ज्ञान भी सीख रहे है।
-अन्य बंदी भी कर रहे सहयोग
कारागृहों में नोटबुक, स्लेट व किताबें उपलब्ध करवाने के बाद अब अन्य साक्षर बंदी भी अपने साथी निरक्षर बंदियों को साक्षर करने के लिए आगे आ रहे हैं और वे उनको अक्षर ज्ञान सीखा रहे है।