रामलीला में सीता हरण का मंचन देख दर्शक मंत्रमुग्ध, रामलीला में छठें दिन उमड़ी शहरवासियों की भीड़


सांचौर। धर्म प्रचारक रामलीला मंडल काशी द्वारा गोगाजी की ओरडी परिसर में काशी की ओर से चल रही रामलीला में 6 दिन रामलीला में सूर्पनखा का नाक और कान लक्ष्मण क्रोधित होकर काट लेते हैं, सीता हरण का मंचन हुआ। इस दृश्य पर दर्शकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट से श्रीराम का जयघोष किया। यह मंचन समाज को अच्छी दिशा देता है। सूर्पनखा अपनी शादी का प्रस्ताव लेकर भगवान राम के पास स्वयं गई थी, मानव से प्रमाण देता है कि आज भी सूर्पनखा जैसी गलतियां बहुत से समाज में हो रही है। रामचरितमानस मानव जीवन जीने के लिए सबसे बड़ा ग्रंथ है रामचरितमानस से सब कुछ सीख लेनी चाहिए। नाक तो उसी समय कट गई थी सूर्पनखा की जब अपनी शादी का प्रस्ताव लेकर स्वयं गई थी, दूसरा माता सीता रेखा के बाहर आकर बिठा दी जिससे उनका हरण हुआ। माता सीता ने महिलाओं को दर्शाती है की महिलाओं को मारादारुपी रेखा में रहनी चाहिए नहीं तो आज भी बहुत मायावी रावण घूम रहे हैं। जो समाज में हो रहा है ऐसे आयोजनों से महिलाओं को काफी बड़ी सीख मिलती है। और समाज में अच्छा सुधार आता है क्योंकि सुनना और देखना दोनों मिलता है। रामलीला जैसे मंचों से आज रामलीला के प्रति लोगों का भाव खत्म होते जा रहा है रामलीला जैसा मंचन एक समाज में अच्छा संदेश जीवन जीने की कला सिखाता है। सांचौर की धर्म भूमि पर बहुत वर्षों बाद रामलीला हो रही है जो अपने आप में अद्भुत है। छठें दिन के कार्यक्रम में डॉ. अशोक तलेसरा, राधेश्याम वैष्णव, डॉ. उत्तम पुरोहित, डॉ. उदाराम वैष्णव, रामचंद्र अग्रवाल, गिरीश वैष्णव, मदनलाल, सोनाराम पुरोहित, श्रवणसिंह राव सहित बड़ी संख्या में शहरवासी मौजूद थे।